सनातन प्रवाह – हेमंत ऋतु अंक – २०२५
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Description
जैसे ही शुरुआती सर्दियाँ आती हैं, प्रकृति धीरे-धीरे शांत हो जाती है और हमें अपने भीतर झाँकने के लिए प्रेरित करती है। भारतीय परंपरा में इस ऋतु को आत्मचिंतन, आत्म-अनुशासन तथा शरीर और मन—दोनों को सशक्त बनाने के लिए उपयुक्त माना गया है। इसी भावना को ध्यान में रखते हुए सनातन प्रवाह आपके लिए यह अंक प्रस्तुत कर रहा है, जोप्राचीन भारतीय ज्ञान को सरल और अर्थपूर्ण ढंग से आज के जीवन से जोड़ता है।
इस अंक की शुरुआत आयुर्वेद के दिव्य स्रोत श्री धन्वंतरि से होती है। उनकी शिक्षाएँ हमें यह स्मरण कराती हैं कि सच्चा स्वास्थ्य केवल रोगों से मुक्ति नहीं है, बल्कि शरीर, मन और जीवनशैली का संतुलन है। आज के समय में, जब अनेक लोग दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे हैं, यह ज्ञान पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक प्रतीत होता है।
आज सबसे अधिक गलत समझे जाने वाले शब्दों में से एक है “सनातन”। इस अंक में हम इसके वास्तविक अर्थ को स्पष्ट करते हैं—जो शाश्वत है, सार्वभौमिक है और विकास के लिए सदैव खुला है। सनातन किसी एक काल या वर्ग तक सीमित नहीं है; यह सत्य, सामंजस्य और करुणा पर आधारित जीवन जीने की एक पद्धति है।
इस अंक के कई लेख भारत की समृद्ध दार्शनिक और आध्यात्मिक परंपराओं पर केंद्रित हैं। पाठक त्रि-शिखी ब्रह्मोपनिषद के योगिक विचारों, भारतीय दर्शन के छह दर्शनों की आधारशिला तथा प्राचीन महाकाव्यों के गूढ़ अर्थों से परिचित होंगे। महाभारत की कथाओं और कुरुक्षेत्र की पवित्र भूमि को कर्तव्य, चयन और आंतरिक संघर्ष की जीवंत शिक्षाओं केरूप में प्रस्तुत किया गया है।
हम मानव शरीर और ब्रह्मांड के बीच के संबंध पर भी दृष्टि डालते हैं। ग्रहों के प्रभाव और अष्टांग हृदयम् पर आधारित लेख यह दर्शाते हैं कि भारतीय ज्ञान परंपराओं में जीवन को शारीरिक, मानसिक और ब्रह्मांडीय—तीनों स्तरों पर एक पूर्ण इकाई के रूप में देखा गया है।
परंपरा के साथ-साथ यह अंक आधुनिक विषयों पर भी प्रकाश डालता है। कोविड के बाद होने वाले साइलेंट हार्ट अटैक और आधुनिक रक्षा प्रणालियों जैसे विषय पाठकों को आज की स्वास्थ्य एवं वैश्विक चुनौतियों को समझने में सहायता करते हैं।
इस अंक के माध्यम से सनातन प्रवाह का उद्देश्य जागरूकता बढ़ाना, विचारशील जीवन को प्रोत्साहित करना और यह दिखाना है कि प्राचीन ज्ञान आधुनिक समय में भी हमारा मार्गदर्शन कर सकता है।






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