Sale!

सनातन प्रवाह – शिशिर ऋतु अंक – २०२६

Original price was: ₹51.Current price is: ₹11.

Free shipping on orders over $50!

  • Check Mark Satisfaction Guaranteed
  • Check Mark No Hassle Refunds
  • Check Mark Secure Payments
GUARANTEED SAFE CHECKOUT
  • Visa Card
  • MasterCard
  • American Express
  • Discover Card
  • PayPal

Description

भारतवर्ष की वास्तविक शक्ति उसकी उस अद्भुत क्षमता में निहित हैजिसके द्वारा वह अपने सनातन ज्ञान-विज्ञान एवं आधुनिक उपलब्धियों का समन्वय करता आया है। प्रस्तुत अंक के विविध विषय इसी सत्य को प्रतिपादित करते हैं। एक ओर आयुर्वेद के प्राचीन ग्रन्थ भेल संहिता का आरोग्य-विज्ञान हैतो दूसरी ओर मण्डल ब्रह्मोपनिषद् का दिव्यआध्यात्मिक चिन्तन। सभा पर्व की नीति-शिक्षा तथा सांख्य दर्शन का गूढ़ तात्त्विक विवेचन हमें भारतीय मनीषा की अनुपम गहराइयों का परिचय कराते हैं। संक्रान्तिवसन्त पंचमी जैसे पर्व तथा गोत्र जैसी सनातन व्यवस्थाएँ इस तथ्य को स्पष्ट करती हैं कि हमारी संस्कृति सदैव प्रकृतिविज्ञान एवं आत्मचेतना के साथ समन्वित रही है 

वर्तमान युग में मानसिक स्वास्थ्य एक महत्त्वपूर्ण विषय बन गया है। इस अंक में बाइपोलर विकार के माध्यम से इस समस्या पर प्रकाश डाला गया है। यह हमें स्मरण कराता है कि वास्तविक उन्नति केवल भौतिक नहीं, अपितु शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक—तीनों स्तरों पर होनी चाहिए। योग, ध्यान तथा भारतीय जीवन-दर्शन जैसी प्राचीन विधियाँ आधुनिक मनोविज्ञान के साथ मिलकर मानव जीवन को संतुलित एवं सुखमय बनाने में सहायक सिद्ध हो सकती हैं। 

राष्ट्र के भावी विकास में आधुनिक प्रौद्योगिकी की भी महत्त्वपूर्ण भूमिका है। ब्लॉकचेन तकनीक ऐसी ही एक नवीन व्यवस्था है, जो पारदर्शिता, सुरक्षा एवं विश्वसनीयता को सुदृढ़ करने की क्षमता रखती है। शासन-प्रशासन, वित्तीय लेन-देन तथा अभिलेखों के संरक्षण में इसका सदुपयोग भ्रष्टाचार की रोकथाम एवं जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में सहायक हो सकता है। इससे व्यवस्था अधिक उत्तरदायी तथा जनविश्वास के योग्य बन सकती है। 

वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को साकार करने हेतु आवश्यक है कि हम अपनी सांस्कृतिक जड़ों से दृढ़तापूर्वक जुड़े रहें तथा साथ ही आधुनिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का विवेकपूर्ण उपयोग करें। शिक्षा ऐसी हो, जिसमें भारतीय ज्ञान-परम्परा एवं नवीन विज्ञान दोनों का समुचित समावेश हो। तभी हम केवल कुशल व्यक्तियों का ही नहीं, अपितु चरित्रवान, उत्तरदायी एवं राष्ट्रनिष्ठ नागरिकों का निर्माण कर सकेंगे। 

भारत का उज्ज्वल भविष्य अतीत और वर्तमान में से किसी एक को चुनने में नहीं, बल्कि दोनों के श्रेष्ठ तत्त्वों के सामंजस्य में निहित है। जब सनातन विरासत और आधुनिक नवोन्मेष एक साथ आगे बढ़ेंगे, तभी एक ऐसे भारत का निर्माण होगा जो शक्तिशाली, नैतिक, आत्मनिर्भर एवं विश्वकल्याण के लिए समर्पित होगा। 

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “सनातन प्रवाह – शिशिर ऋतु अंक – २०२६”

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Phone
WhatsApp
Email
WhatsApp
Phone
Email